भाकृअनुप-केंद्रीय अंतर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान में “अंतर्स्थलीय मात्स्यिकी में भू-स्थानिक अनुप्रयोग” पर ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम

भाकृअनुप-केंद्रीय अंतर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान ने राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड, प्रधान मंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के साथ मिलकर दिनांक 26 मार्च, 2021 को “अंतर्स्थलीय मात्स्यिकी में भू-स्थानिक अनुप्रयोग” पर एक ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम संस्थान के निदेशक, डा. बि के दास के नेतृत्व में आयोजन किया। इस प्रशिक्षण में विभिन्न प्रभाग प्रमुख डा. एस. सामंता, प्रभागाध्यक्ष, नदीय एवं परितंत्र मात्स्यिकी प्रभाग (REF); डा. यू.के. सरकार, प्रभागाध्यक्ष, जलाशय और आर्द्रक्षेत्र मात्स्यिकी प्रभाग (REF); डा. बी के बेहरा, प्रभागाध्यक्ष, जलीय पर्यावरण जैव प्रौद्योगिकी और नैनो प्रौद्योगिकी (AEBN) प्रभाग; डा. एस के नाग, प्रभागाध्यक्ष, मत्स्य संसाधन मूल्यांकन और सूचना विज्ञान (FRAI) प्रभाग तथा श्री एस.के. साहू, प्रभारी, एकेएमयू, और प्रशिक्षण और विस्तार इकाई से डा. ए के दास और श्री गणेश चंद्र उपस्थित थे। इस ऑनलाइन कार्यक्रम में कई सम्मानित प्रतिभागी, डा. मीरा डी अंसल, डीन, मात्स्यिकी महाविद्यालय, गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं प्राणी विज्ञान विश्व विद्यालय (GADVASU) , संस्थान के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, बैंगलोर से श्री एम. कार्तिकेयन, डीन, मात्स्यिकी महाविद्यालय, ओडिशा के छात्र; रु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं प्राणी विज्ञान विश्व विद्यालय (GADVASU), लुधियाना और कामधेनु विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ उपस्थित थे। । इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में संस्थान सहित अन्य विश्वविद्यालयों के कुल 70 सक्रिय कर्मियों (50 ऑनलाइन और 20 ऑफ़लाइन) ने ऑनलाइन मोड में भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के निदेशक, डा. बि.के. दास ने किया और अंतर्स्थलीय मत्स्य पालन में भू-स्थानिक तकनीकों के अनुप्रयोग में संस्थान की उपलब्धियों को प्रस्तुत किया। उन्होंने संस्थान द्वारा क्रियान्वित सूदूर संवेदी (रिमोट सेंसिंग) और जीआईएस (GIS) तकनीक तथा उनकी उपलब्धियों के बारे में बताया। उन्होंने अंतर्स्थलीय जलीय जीवों के प्रबंधन में क्रियान्वित भू-स्थानिक तकनीकों की दिशा में संस्थान द्वारा किए गए विभिन्न कार्यों की एक रूपरेखा दी। डा. पी. के. परिदा ने मत्स्य पालन के विभिन्न पहलुओं के लिए जीआईएस अनुप्रयोग का एक परिदृश्य प्रस्तुत किया कि कैसे विभिन्न स्थानिक और लौकिक आंकड़ों को जीआईएस प्लेटफॉर्म में प्रस्तुत किया जा सकता है और उन्होने जीआईएस एप्लिकेशन से लाभ पर भी प्रकाश डाला। डा. एस के साहू ने ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर और खरीदे गए जीआईएस सॉफ्टवेयर पर एक तुलनात्मक प्रस्तुति दी और दोनों सॉफ्टवेयर्स के अतिरिक्त बिंदुओं पर प्रकाश डाला। सुश्री मनीषा ने जीआईएस का एक परिचय दिया। सुश्री तनिया ने जीआईएस पर डेटा प्रस्तुति के बारे में बताया। सभी प्रतिभागियों को विचार मंथन सत्र के दौरान उनके प्रश्नों को स्पष्ट किया गया। समग्र कार्यक्रम को श्री एस के साहू वरिष्ठ वैज्ञानिक, डॉ. पी.के. परीदा,वैज्ञानिक द्वारा डॉ. ए के दास, ई एंड टी सेल द्वारा अच्छी तरह से समन्वित किया गया। कार्यक्रम में मो. नईम तकनीकी सहायक और श्री अविषेक साहा, तकनीकी सहायक, द्वारा सहायता प्रदान की गई।


  
  


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2017 Last updated on 27/03/2021