सिफरी द्वारा आर्द्रभूमि हितधारकों में जागरूकता हेतु एक वेबिनार का आयोजन

भाकृअनुप-केन्द्रीय अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान ने दिनांक 15 फरवरी, 2022 को 'किसानों की आय दोगुनी करने के लिए पारिस्थितिकी तंत्र आधारित एकीकृत आर्द्रभूमि प्रबंधन' विषय पर वेबिनार का आयोजन किया। यह वेबिनार राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड (एनएफडीबी) द्वारा प्रायोजित किया गया जिसमें देश के पूर्वोत्तर राज्यों जैसे, असम, मेघालय, त्रिपुरा, मणिपुर और पश्चिम बंगाल के मछुआरों, मछली पालकों, मत्स्य अधिकारियों सहित मात्स्यिकी विद्यालयों के छात्र सहित कुल 97 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के गुवाहाटी अनुसंधान केंद्र के प्रभागाध्यक्ष, डॉ. बी.के. भट्टाचार्य के स्वागत सम्बोधन के साथ हुआ। इसके बाद संस्थान के निदेशक, डॉ. बि. के. दास ने अपने उद्घाटन भाषण में पारिस्थितिकी तंत्र आधारित एकीकृत आर्द्रभूमि प्रबंधन पर एक संक्षिप्त परिचय दिया। डॉ. दास ने यह कहा कि सिफरी की प्राथमिकता पारिस्थितिकी तंत्र आधारित दृष्टिकोण तथा स्थायी अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी प्रबंधन के बारे में हितधारकों में जागरूकता और संवेदनशीलता पैदा करना चाहिए। इसके बाद डॉ. बी.के. भट्टाचार्य ने आर्द्रक्षेत्र (बील) में एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन पर एक विवरण दिया। डॉ. सिमांकु बोरा, वैज्ञानिक, गुवाहाटी अनुसंधान केंद्र ने उत्पादन और आय में वृद्धि के लिए बील क्षेत्र में घेरे में मछली पालन और इससे मत्स्य उत्पादन वृद्धि के बारे में बताया। संस्थान मुख्यालय से डॉ. अपर्णा रॉय, वरिष्ठ वैज्ञानिक ने अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी प्रबंधन में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) पर एक प्रस्तुति दी। व्याख्यानों के बाद एक चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का समापन डॉ. सिमांकु बोरा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया। इस वेबिनार का संचालन संस्थान के निदेशक, डॉ. बि. के दास के नेतृत्व में डॉ. बी.के. भट्टाचार्य, डॉ अपर्णा रॉय और डॉ सिमांकु बोरा द्वारा किया गया।


16/02/22 को अद्यतन किया गया


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