भाकृअनुप-सिफ़री द्वारा पश्चिम बंगाल के डूमा आर्द्रभूमि में मत्स्य हार्वेस्ट मेला का भव्य आयोजन
30 अप्रैल, 2022
भाकृअनुप-सिफ़री पश्चिम बंगाल के विभिन्न आर्द्रभूमियों में अनुसूचित जनजाति उपयोजना कार्यक्रम (एससीएसपी) के तहत आर्द्रभूमि में उत्पादन बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना में स्थित डूमा एशिया की सबसे बड़ी घोड़े की नाल के आकार की आर्द्रभूमियों में से एक है, जिसका क्षेत्रफल 257 हेक्टेयर है और पानी की गहराई 8 - 17 फीट है। डूमा फिशरमेन्स कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड आर्द्रभूमि के प्रबंधन कार्य से युक्त है। 30 महिला मछुआरों सहित 1081 सदस्य इसमें शामिल हैं। डूमा आर्द्रभूमि के आसपास के 9 गांवों के मछुआरे परिवार पूरी तरह से इस आर्द्रभूमि पर निर्भरशील हैं। भाकृअनुप-सिफ़री ने फरवरी 2021 में निदेशक डॉ. बि.के.दास की प्रेरणा और नेतृत्व में उत्पादन वृद्धि प्रदर्शन के लिए इस आर्द्रभूमि में काम शुरू किया और तीन साल की अवधि के भीतर मछली उत्पादन को 1000 किग्रा/हेक्टेयर/वर्ष तक बढ़ाने के लक्ष्य के साथ पेन कल्चर प्रदर्शन की भी शुरूवात की। पेन कल्चर प्रदर्शन के लिए 0.1 हेक्टेयर के छह सिफ़री एचडीपीई®पेन स्थापित किए गए जिनमें पाँच पेन में भारतीय मेजर कार्प (1,20,000 संख्या/लगभग 710 किग्रा) और ग्रास कार्प (12,000 संख्या/लगभग 70 किग्रा) की अंगुलिमीन स्थापित किए गए। एक पेन में छोटी देशी मछली (एसआईएफ) सिस्टोमस सरना (19,250 संख्या लगभग 55 किग्रा) के मछली के बीज स्टॉक किए गए। एस. सराना, जिसे स्थानीय रूप से सर पुंटी के नाम से जाना जाता है, एक ऑटो ब्रीडर और सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर मछली है। इस प्रकार, सिफ़री छोटी देशी मछली (एसआईएफ) के उत्पादन को बढ़ाने और ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त पोषण सुरक्षा प्रदान करने के लिए आर्द्रभूमि मत्स्य पालन में सरना मॉडल को बढ़ावा दे रहा है। तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन के अलावा, सिफ़री ने मछली फ़ीड (लगभग 9.0 टन) और मछली बीज जैसे इनपुट भी प्रदान किए। सिफ़री की सहायता से आर्द्रभूमि सहकारी समिति ने मछलियों को पेन में 35-40 ग्राम के आकार तक बढ़ा किया और उसके बाद आर्द्रभूमि में छोड़ दिया।

जुलाई 2021 में मछली की पहली पकड़ में लगभग 64 टन मछली पकड़ी गई जिसकी कीमत लगभग रु 52 लाख थी। अत्यधिक वर्षा के कारण मानसून के बाद नवंबर 2021 में पकड़ नहीं की गई थी। इस वर्ष, सहकारी समिति द्वारा पिछले फरवरी 2022 से मछली की पकड़ शुरू की गई है। 18 अप्रैल 2022 को सहकारी समिति के सक्रिय समर्थन के साथ पकड़ के 63 वें दिन, सिफ़री द्वारा मत्स्य हार्वेस्ट मेला का आयोजन किया गया। इस हार्वेस्ट मेला के अवसर पर उन्होंने भारतीय प्रमुख कार्प (आईएमसी) और अन्य देशी मछलियों सहित लगभग 250 किलोग्राम मछलियों की पकड़ की। इन 2 महीने की लंबी पकड़ अवधि के दौरान, उन्होंने लगभग 30 लाख मूल्य की 15 टन व्यावसायिक मछली की पकड़ की है। मछलियों को स्थानीय बाजार और मछली डीलरों को बेचा गया। आईएमसी का बाजार मूल्य 200-250 / किग्रा रुपये होता है। इस आर्द्रभूमि में कुछ उच्च मूल्य वाले देशी मछलियाँ भी पाई जाति है जैसे स्नेकहेड (रुपये 350-400/किग्रा), नोटोप्टेरस एसपीपी (250-300/किग्रा) अनाबास टेस्टुडीनस (250-300/किग्रा) और कैटफ़िश (450-500/किग्रा)। हालाँकि बाढ़ के दौरान समिति को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा, फिर भी मछुआरों को कुल 79 टन मछलियाँ मिलीं, जो 82 लाख रुपये का लाभ देती हैं। जबकि वर्ष 2020-21 और 2019-20 में उन्होंने लगभग 73 टन और 87 टन मछली की पकड़ की थी।

इसके अलावा, 500 से अधिक सक्रिय मछुआरे नियमित रूप से छोटी देशी मछलियों जैसे गुडुसिया छपरा, एंब्लीफरींगोडन मोला, सिस्टोमस सरना, पुंटियस एसपीपी, ग्लोसोगोबियस ग्यूरिस, मैक्रोग्नैथस एसपीपी, कैटफ़िश, छोटे आकार के मुर्रल आदि मछली की पकड़ में शामिल हैं। औसतन, वे साल में लगभग 300 दिनों के लिए इस आर्द्रभूमि से एसआईएफ 3-4 किग्रा/दिन/व्यक्ति पकड़ते हैं। कुल एसआईएफ कैच का लगभग 20% अपने स्वयं के उपभोग के लिए उपयोग किया जाता है और बाकी को स्थानीय बाजार में 100-250 / किग्रा रुपये की कीमत पर बेचा जाता है। इस प्रकार, एसआईएफ मछली पकड़ने से प्रति वर्ष लगभग 10.0 करोड़ रुपये का उत्पादन हो रहा है, जो स्थानीय मछुआरों की आजीविका का समर्थन करता है।

आर्द्रभूमि में मैक्रोफाइट थी जो ईकोर्निया एसपीपी से प्रभावित थी। सिफ़री ने उन्हें मैक्रोफाइट्स को हटाने की सलाह दी। मछुआरे आम तौर पर एक छोटे क्षेत्र से जलीय वनस्पति को साफ करते हैं और फिर मछली पकड़ते हैं। डूमा में 18. 04. 2022 में मत्स्य हार्वेस्ट मेला के दौरान, सिफ़री के माननीय निदेशक महोदय डॉ. बि. के. दास ने मछुआरों को सलाह दी कि वे अपनी आय में वृद्धि और छोटी मछलियों के संरक्षण के लिए आर्द्रभूमि में ऑटो-स्टॉक किए गए उच्च मूल्य वाले स्वदेशी प्रजाति के माइनर कार्प को अपनाएं। उन्होंने आर्द्रभूमि में जलमग्न मैक्रोफाइट्स को नियंत्रित करने के लिए जैविक नियंत्रण तंत्र के रूप में ग्रास कार्प को स्टॉक करने की भी सलाह दी। मेले में वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की एक टीम मौजूद थी और उन्होंने मछुआरों को सलाह दी कि वे सिफ़री प्रौद्योगिकियों को अपनाएं और अपने लाभ से कुछ राशि बचाकर पेन/आर्द्रभूमि में मछली भंडारण के लिए उपयोग करें। इस आर्द्रभूमि के मछुआरे आर्द्रभूमि के विकास के लिए सिफ़री के आभारी हैं। डॉ. ए. के. दास, सुश्री प्रजना आर. स्वैन, डॉ.श्रेया भट्टाचार्य, और सुश्री सुप्रीति बाएन सिफ़री की तकनीकी टीम का हिस्सा थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पी. के. परिदा ने किया।




यह वेबसाइट भाकृअनुप-केन्द्रीय अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के तहत एक स्वायत्त संगठन से सम्बंधित है। कॉपीराइट @ 2010 आईसीएआर, यह वेबसाइट 2017 से कृषि ज्ञान प्रबंधन इकाई द्वारा विकसित और अनुरक्षित है।
अंतिम बार 30/04/22 को अद्यतन किया गया